New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच द्विपक्षीय वार्ता में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। भारत ने स्पष्ट रूप से न्यूजीलैंड सरकार के समक्ष अपनी चिंताओं को रखा और वहां मौजूद भारत विरोधी तत्वों की गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई।
Terrorism के खिलाफ साझा संकल्प
पीएम मोदी ने इस बैठक में आतंकवाद, अलगाववाद और कट्टरपंथी गतिविधियों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि क्राइस्टचर्च हमला (2019) और मुंबई 26/11 जैसे आतंकी हमले अस्वीकार्य हैं। उन्होंने आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए न्यूजीलैंड के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
Newzeland Government ने जताया सहयोग का भरोसा
भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) जयदीप मजूमदार ने बताया कि भारत ने न्यूजीलैंड को वहां सक्रिय भारत विरोधी संगठनों और उनकी गतिविधियों के बारे में अवगत कराया। उन्होंने कहा, “हम अपने मित्र देशों को सूचित करते हैं कि कुछ तत्व लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। न्यूजीलैंड सरकार ने हमारी चिंताओं को पहले भी गंभीरता से लिया है और इस बार भी सकारात्मक रुख दिखाया है।”
रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
भारत और न्यूजीलैंड के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता भी किया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश मिलकर अवैध गतिविधियों को रोकने और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करेंगे।
अन्य देशों से भी भारत की अपील
भारत ने सिर्फ न्यूजीलैंड ही नहीं, बल्कि यूके सहित अन्य देशों से भी खालिस्तानी गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाने की अपील की है। हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की लंदन यात्रा के दौरान सुरक्षा उल्लंघन का मुद्दा भी ब्रिटेन के समक्ष उठाया गया था।
भारत का कड़ा संदेश
पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि न्यूजीलैंड सरकार इस मुद्दे पर भारत के साथ सहयोग बनाए रखेगी और आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
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